मेर् निजी विचार

मेर् निजी विचार जो समाज के बिखराव के कारण है इस प्रकार है पर ज़रूरी नही है कि आप सब सहमत हो,
1-अपने देश की भौगोलिक परिस्थिति जहाँ भाषायी और क्षेत्रीयता को वरीयता देने से संगठनों की भरमार है जो की गलत तो नही कहा जा सकता परन्तु राष्ट्रीय स्तर पर आपसी तालमेल नही देखा जाता।
2-कई रॉष्ट्रीय संघटन तो है पर उनकी हर राज्य तक पकड़ नही है,क्योंकि क्षेत्रीय संघटन अपने यहाँ मजबूत होते है,या हर शहर में कई कई संघटन बने हुए है और आज किसी भी संघटन के पदाधिकारी दूसरे के साथ या पीछे नही चलना चाहते।निजी लाभ या अपनी अतिमहत्वाकांक्षा पर केंद्रित होते है,समाज के विकास से उनको कोई मतलब नही होता,निजी पहचान से बस अपने रेजनेटिक सम्बन्ध बनाते बनाते समाज को भूल जाते है और समाज उनको या अन्य किसी भी गंभीर संघटन व् लोगों से भी दूर हो जाता है,मतलब आज अधिकतम समाज अपने समाज के नेतृत्व से विशवास खो चुका है।इसलिए आज न तो नेताओं के पीछे खास जनाधार होता है न ही समाज इकट्ठा हो पा रहा है।
3-आज राजनीती के व्यावसायिक हो जाने से हर किसी की अतिमहत्वाकांक्षा हावी है,हर कोई अलग अलग संघटन बनाकर अपनी पहचान बनाकर बहुत जल्दी बड़ा बनने में लगा है और समाज को केवल इस्तेमाल करता है,समाज भी आज जागरूक हुआ है तो यही विवाद होते है और आपसी तालमेल ख़त्म हो रहा है।
4-समाज का बुद्धिजीवी एवं युवा वर्ग जो हमेशा राजनीती और संगठनों से दूरी बनाकर रहता था आज इनमें रुच्ची ले रहा है और चाहता है कि समाज के लिए कुछ किया जाना बहुत ज़रूरी है और हर कोई अपने स्तर से प्रयास कर भी रहा है।
5-वर्षों से समाज में सैकड़ो संगठनों और समाज के कर्णधारों की असफलता देखकर आज का युवा नेतृत्व हाथ में लेने को आतुर है,उनमे जोश जज़्बा और जूनून है जिसको सही दिशा और मार्गदर्शन की ज़रूरत है।
6-समाज में ऐसा नही है कि सब संघटन काम नही कर रहे है,हर राज्य में कई संघटन है जिन्होंने शानदार कार्य किये है और निरंतर ज़ारी है जिसमे राजष्ठान,गुजरात,हरयाणा दिल्ली बहुत आगे है और काफी लोग वास्तव में निस्वार्थ समाज के विकास की बुनियाद में बड़े बड़े सहयोग कर रहे है।
7-इतने बड़े देश में एक ही संघटन हो,ये नही हो सकता लेकिन ये अवश्य हो सकता है कि सब संघटन के पदाधिकारी एक साझा मंच बनाये और समाज के विकास के बिंदुओं पर एक साथ प्लान बनाये जिनको हर राज्य में अमल किया जाय समाज के चहुमुखी विकास के लिए।
8-आज तक कुम्हार् समाज की प्रतिभाओं ने हर क्षेत्र में अपनी मेहनत के बल पर अपनी शानदार उपस्थिति दर्ज कराई है परन्तु एक सच ये भी है कि राजनीति में बहुत पीछे है जो की आज सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है और समाज के बुद्धिजीवी वर्ग को इस पर चिंतन की आवश्यकता है।आज तक हम इस्तेमाल होते आये है पर कब तक होते रहेंगे?जबकि अपने समाज में इस क्षेत्र के लिए भी प्रतिभाओं की कोई कमी नही है।पर पीछे क्यों रह जाते है इस पर चिंतन ,मनन और प्लान बनाने की आवश्यकता है।आज के दौर में अतिमहत्वाकांक्षा के कारण हम समाज के उत्थान को भूलकर निजी स्वार्थ में आपसी खींचतान में इलझे है,जिससे कोई भी आगे नही निकल पाता है और कुछ लोग अन्य पार्टि के प्रतिनिधि बनकर रह जाते है।
9-एक साझा मंच बनाए जिसमे अलग अलग विंग बने जो अलग अलग क्षेत्र में समाज के विकास की योजनाएं बनाकर उन पर अमल किया जाय।जैसे राजनीती,शिक्षा,रोजगार आदि।
साथियों ऐसे बहुत से बिंदु है जिन पर बात की जा सकती है और की जानी चाहिए-पूर्ण निस्वार्थ और त्याग की भावना के साथ।
पर करे कौन और क्यों?
निजी स्वार्थ और अतिमहत्वाकांक्षा को त्यागे कौन और क्यों?
व्यक्ति बड़ा है या समाज?
सबसे पहले ये फैसला अहम् है।
समाज उत्थान हेतु आगे आकर कमान लेने को तैयार बंधूओं को साथ देने को तत्पर,